रोजमर्रा का सामान जुटाने में ही स्कूल प्रबंधन परेशान

रोजमर्रा का सामान जुटाने में ही स्कूल प्रबंधन परेशानजागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली : राजधानी के स्कूलों में रोजाना उपयोग में आने वाले सामान जु
जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली :

राजधानी के स्कूलों में रोजाना उपयोग में आने वाले सामान जुटाने में भी इन दिनों स्कूल प्रबंधन को माथापच्ची करनी पड़ रही है। इसकी वजह है जीएसटी। दरअसल, स्कूलों में माल की आपूर्ति करने वाले ज्यादातर थोक विक्रेताओं के पास जीएसटी नंबर नहीं है और वे जीएसटी नंबर वाले बिल के साथ सामान नहीं दे सकते। ऐसे हालात में अधिकतर स्कूलों के ¨प्रसिपल ऊहापोह की स्थिति में फंसे हैं।

स्कूलों में रोजाना पठन-पाठन से जुड़ी सामग्रियों, सफाई से संबंधित सामान फिनाइल, झाड़ू, मच्छर मारने की दवा आदि की जरूरत पड़ती है। इसके लिए भी प्रबंधन को मशक्कत करनी पड़ रही है। स्कूल प्रबंधन कमेटी की सदस्य अंजलि पाटिल (सीनियर सेकेंड्री स्कूल, जीटीबी नगर) और सिमी हांडा (सर्वोदय कन्या विद्यालय, विजय नगर) ने बताया कि थोक विक्रताओं का कहना है कि उनके पास अधिक आमदनी नहीं है, इसलिए वे जीएसटी नंबर के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं करवा सकते। वहीं, स्कूल प्रमुख जीएसटी के तहत नए करों के अनुसार वाला बिल चाहते हैं, ताकि उस बिल के आधार पर वे विभाग से राशि का भुगतान ले सकें।

एक स्कूल में सैकड़ों बच्चे पढ़ते हैं। यदि इसी तरह से सामान की कमी होती रही तो कुछ समय बाद स्कूल बंद करने की नौबत आ सकती है। इसलिए जल्द से जल्द समाधान निकाला जाना चाहिए।

विनोद गोस्वामी, सीनियर सेकेंड्री स्कूल, जीटीबी नगर

जीएसटी को लेकर अब भी जागरूकता की कमी है। इसे लेकर फुटकर और थोक विक्रेताओं को मार्केट के अनुसार तैयार करने की जरूरत है। इसके लिए विभाग को अपनी ओर से प्रयास करना चाहिए।

विजय चोपड़ा, सीनियर सेकेंड्री स्कूल, ढका
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